Skip to main content

सृष्टि की आरम्भ - बाइबल कहानियाँ


सृष्टि की आरम्भ



उत्पत्ति अध्याय 1-2 से बाइबल की एक कहानी

परमेश्वर का आत्मा पानी के ऊपर मंडराता था


इस प्रकार से आरम्भ में परमेश्वर ने सब चीजों की सृष्टि की। उसने छः दिनों में संसार की और जो कुछ उसमें है उन सब की । परमेश्वर द्वारा पृथ्वी की रचना के बाद वह अंधकारमय और खाली थी, क्योंकि अभी तक परमेश्वर ने उसमें किसी भी चीज को नहीं बनाया था। परन्तु परमेश्वर का आत्मा पानी के ऊपर मंडराता था।

OBS Image
पहले दिन में उजियाले की रचना 

फिर परमेश्वर ने कहा, "उजियाला हो!" और उजियाला हो गया। परमेश्वर ने देखा कि उजियाला अच्छा है और उसे "दिन" कहा। और उसने उसे अंधकार से अलग किया जिसे उसने "रात" कहा। परमेश्वर ने सृष्टि करने के पहले दिन में उजियाले की रचना की।

OBS Image
पानी के ऊपर एक अंतर हो

सृष्टि करने के दूसरे दिन में परमेश्वर ने कहा, "पानी के ऊपर एक अंतर हो।" और एक अंतर हो गया। परमेश्वर ने उस अंतर को "आकाश" कहा।

OBS Image
सूखी भूमि को पृथ्वी" कहा और पानी को "समुद्र" कहा

तीसरे दिन में परमेश्वर ने कहा, "पानी एक स्थान पर इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे।" उसने सूखी भूमि को "पृथ्वी" कहा और पानी को "समुद्र" कहा। परमेश्वर ने देखा कि जो उसने बनाया था वह अच्छा था।

OBS Image
पृथ्वी सब प्रकार के पेड़ और पौधे
 

फिर परमेश्वर ने कहा, "पृथ्वी सब प्रकार के पेड़ और पौधे उगाए।" और ऐसा ही हुआ। परमेश्वर ने देखा कि जो उसने बनाया था वह अच्छा था।

OBS Image
आकाश में ज्योतियाँ

सृष्टि करने के चौथे दिन में परमेश्वर ने कहा, "आकाश में ज्योतियाँ हों।" और सूर्य, चंद्रमा और तारागण प्रकट हुए। परमेश्वर ने उनको पृथ्वी पर प्रकाश देने के लिए और दिन और रात, मौसमों और वर्षों में भेद करने के लिए बनाया। परमेश्वर ने देखा कि जो उसने बनाया था वह अच्छा था।

OBS Image
जीवित प्राणी पानी को भर दें

पाँचवें दिन परमेश्वर ने कहा, "जीवित प्राणी पानी को भर दें और आकाश में पक्षी उड़ें।" इस प्रकार से उसने पानी में तैरने वाले सब जन्तुओं को और सभी पक्षियों को बनाया। परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा था और उनको आशीष दी।

OBS Image
भूमि पर रहने वाले सभी प्रकार के जानवर हों

सृष्टि के छठवें दिन में परमेश्वर ने कहा, "भूमि पर रहने वाले सभी प्रकार के जानवर हों।" और परमेश्वर के कहे अनुसार ऐसा हो गया। कुछ जानवर पालतू थे, कुछ भूमि पर रेंगने वाले, और कुछ जंगली जानवर थे। और परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा था।

OBS Image
मनुष्य को अपने स्वरूप में और अपनी समानता में बनाएँ

फिर परमेश्वर ने कहा, "आओ हम मनुष्य को अपने स्वरूप में और अपनी समानता में बनाएँ। वे पृथ्वी पर और सब जानवरों पर प्रभुता करेंगे।"

OBS Image

अतः परमेश्वर ने मिट्टी लेकर उससे मनुष्य को बनाया और उसमें जीवन के श्वांस को फूँक दिया। इस मनुष्य का नाम आदम था। परमेश्वर ने आदम के रहने के लिए एक बड़े बगीचे को बनाया और उसकी देखभाल करने के लिए आदम को वहाँ रख दिया।

OBS Image

उस बगीचे के मध्य में परमेश्वर ने दो विशेष पेड़ लगाए – जीवन का पेड़ और भले और बुरे के ज्ञान का पेड़। परमेश्वर ने आदम से कहा कि वह उस बगीचे के जीवन के पेड़ और भले और बुरे के ज्ञान के पेड़ को छोड़ कर अन्य किसी भी पेड़ के फल को खा सकता है। अगर उसने उस पेड़ का फल खाया तो वह मर जाएगा।

OBS Image

फिर परमेश्वर ने कहा, "पुरुष के लिए अकेला रहना अच्छा नहीं है।" लेकिन कोई भी जानवर आदम का साथी न हो सका।

OBS Image

इसलिए परमेश्वर ने आदम को गहरी नींद में डाल दिया। फिर परमेश्वर ने आदम की एक पसली लेकर उससे एक स्त्री की रचना की और उसे आदम के पास लेकर आया।

OBS Image

जब आदम ने उसे देखा तो उसने कहा, "कम से कम यह तो मेरे जैसी है! यह 'स्त्री' कहलाएगी, क्योंकि यह पुरुष में से बनाई गई है।" इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़ देता है और अपनी पत्नी के साथ एक हो जाता है।

OBS Image

परमेश्वर ने पुरुष और स्त्री को अपने स्वरूप में बनाया। उसने उनको आशीष दी और उनसे कहा, "बहुत सारी संतानें और पोते-परपोते उत्पन्न करो और पृथ्वी को भर दो!" और परमेश्वर ने देखा कि जो कुछ भी उसने बनाया था वह बहुत अच्छा था, और वह उन सब से बहुत प्रसन्न था। यह सब कुछ सृष्टि करने के छठवें दिन हुआ था।

OBS Image

जब सातवाँ दिन आया तो जो कुछ परमेश्वर कर रहा था उसने उस सारे काम को समाप्त किया। उसने सातवें दिन को आशीष दी और उसे पवित्र ठहराया, क्योंकि उस दिन उसने सब चीजों की सृष्टि करने को समाप्त किया था। इस प्रकार से परमेश्वर ने संसार की और जो कुछ उसमें है उन सब की सृष्टि की।


Comments

Popular posts from this blog

গভীর বাইবেল অধ্যয়ন: মথির ৭:২৩-২৯ এর অর্থ বোঝা - MATHEW 7:23-29

  গভীর বাইবেল অধ্যয়ন: মথির ৭:২৩-২৯ এর অর্থ বোঝা ভূমিকা মথির ৭:২৩-২৯ যিশুর পর্বতদেশের উপদেশের সমাপ্তি হিসেবে গণ্য হয়, যেখানে তিনি খ্রিস্টীয় নৈতিকতা এবং আধ্যাত্মিক শৃঙ্খলার মৌলিক বিষয়গুলো তুলে ধরেছেন। এই অধ্যায়টি আমাদেরকে সতর্কতা দেয় এবং যিশুর শিক্ষার উপর ভিত্তি করে জীবন গড়ার আমন্ত্রণ জানায়। এই অধ্যয়নে আমরা এই শ্লোকগুলোর অর্থ, তাদের ঐতিহাসিক প্রেক্ষাপট এবং বিশ্বাসীদের জন্য তাদের প্রয়োগ নিয়ে আলোচনা করব। ১. প্রেক্ষাপটের পটভূমি এই শিক্ষাটি বোঝার জন্য যিশু যে প্রেক্ষাপটে এই উপদেশ প্রদান করেছিলেন তা জানা জরুরি। মথির ৫-৭ অধ্যায়ে অন্তর্ভুক্ত পর্বতদেশের উপদেশটি যিশুর মন্ত্রণালয়ের প্রথম দিকে, ইহুদিদের উদ্দেশ্যে প্রদত্ত ছিল। এই জনগণ মূসার আইন এবং ফারিসীদের শিক্ষার সাথে পরিচিত ছিল, যেখানে ধর্মীয় আচার-আচরণের বহিরাগত পালনকে গুরুত্ব দেওয়া হতো। কিন্তু যিশু এই ধারণাকে চ্যালেঞ্জ করে একটি নতুন পথ নির্দেশ করেন, যা বাহ্যিক শৃঙ্খলার পরিবর্তে হৃদয়ের পরিবর্তনের উপর গুরুত্ব দেয়। ২. মথি ৭:২৩-২৯ এর ব্যাখ্যা এই অংশটি শ্লোক অনুযায়ী বিশ্লেষণ করা যাক: শ্লোক ২৩: “তখন আমি প্রকাশ্যে তাদের বলব, ‘আমি...

প্রেমের উপর একটি ধর্মোপদেশ -প্রেম - ঈশ্বরের সর্বোচ্চ আদেশ

 প্রেমের উপর একটি ধর্মোপদেশ বিষয়: প্রেম - ঈশ্বরের সর্বোচ্চ আদেশ বাইবেল রেফারেন্স: ১ করিন্থীয় ১৩:৪-৭; ১ যোহন ৪:৭-৮ প্রিয় ভাই ও বোনেরা, আজ আমরা ঈশ্বরের পবিত্র বাক্য থেকে প্রেমের বিষয়ে শিখব। প্রেম এমন একটি শক্তি, যা আমাদের জীবনকে পরিবর্তন করতে পারে, আমাদের সম্পর্ককে গঠন করতে পারে, এবং আমাদের হৃদয়ে ঈশ্বরের উপস্থিতি অনুভব করায়। প্রেমের মাধ্যমেই আমরা ঈশ্বরকে জানি এবং তাঁর সঙ্গে একাত্ম হতে পারি। প্রেমের প্রকৃতি পবিত্র বাইবেলে বলা হয়েছে, "প্রেম সহিষ্ণু এবং সদয়; প্রেম হিংসা করে না; প্রেম গর্ব করে না, দাম্ভিক হয় না; তা অসভ্য হয় না, স্বার্থপর হয় না, সহজেই রাগ করে না, এবং কোনো ভুলের হিসাব রাখে না। প্রেম অসত্যের আনন্দ পায় না, বরং সত্যের আনন্দে মুগ্ধ হয়। সবকিছু সহ্য করে, সবকিছুর বিশ্বাস রাখে, সবকিছু আশা করে, সবকিছু সহ্য করে।" (১ করিন্থীয় ১৩:৪-৭)। এই আয়াতগুলি আমাদের প্রেমের প্রকৃতি সম্পর্কে শিখায়। প্রকৃত প্রেম শুধুমাত্র অনুভূতি নয়; এটি ক্রিয়া। প্রেম মৃদু, সহনশীল, এবং বিনয়ী। এটি অন্যদের দোষ ধরে না এবং ঈর্ষা করে না। প্রেম সবকিছু সহ্য করে এবং সর্বদা আশা করে। প্রেমের উৎস প্রেম...

Ten Commandments

 বাইবেলে উল্লিখিত দশটি আদেশ (দশ আজ্ঞা) হল নৈতিক এবং আধ্যাত্মিক আচরণের জন্য অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ নিয়ম। এই আদেশগুলো ঈশ্বর মূসাকে সিনাই পর্বতে প্রদান করেন এবং এগুলো বাইবেলের নির্বাণ অধ্যায় এবং দ্বিতীয় আইন গ্রন্থে লিপিবদ্ধ আছে। দশটি আদেশ (নির্গমন ২০:১-১৭): ১. "তুমি আমার ছাড়া অন্য কোন দেবতা রাখবে না।" একমাত্র সত্য ঈশ্বরের উপাসনা কর; তাঁকে ছাড়া অন্য কিছুকে ঈশ্বরের উপরে স্থান দিও না। ২. "তুমি নিজের জন্য কোনো মূর্তি বা প্রতিমা তৈরি করো না।" কোনো মূর্তি বা প্রতিমা তৈরি করে তার উপাসনা করো না, কারণ একমাত্র ঈশ্বরই উপাস্য। ৩. "তুমি তোমার ঈশ্বরের নাম কোনো অসৎ কাজে ব্যবহার করবে না।" ঈশ্বরের নামকে অসম্মানজনক বা অনুচিতভাবে ব্যবহার করো না। ৪. "বিশ্রামবার মনে রেখো, সেটিকে পবিত্র রাখো।" বিশ্রামবার (সপ্তম দিন) আলাদা করে বিশ্রাম ও উপাসনার জন্য রাখো। ৫. "তুমি তোমার পিতা-মাতাকে সম্মান করবে।" তোমার পিতা-মাতার প্রতি শ্রদ্ধা ও আনুগত্য প্রদর্শন করো। ৬. "তুমি হত্যা করো না।" অন্য কোনো ব্যক্তির জীবন অন্যায়ভাবে কেড়ে নিও না। ৭. "তুমি ব্যভিচার করো ...